<title>(बैरोमीटर)वायुमंडलीय दाब मापी (इवानजेलिस्टा टोरिसेली की जीवनी) -Evangelista Torricelli biography

(बैरोमीटर)वायुमंडलीय दाब मापी (इवानजेलिस्टा टोरिसेली की जीवनी) -Evangelista Torricelli biography


(इवानजेलिस्टा टोरिसेली की जीवनी) -Evangelista Torricelli का जन्म 15 अक्टूबर1608 में इटली के पैजा शहर में हुआ था, बचपन से ही इनका दिल चशपी भौतिक विज्ञान(Physics Science)के तरफ था, वे प्रकृति घटनाओ पर बड़ी सूक्ष्मतासे उश पर धियान देते थे, और उसे समझने का परियाश करते थे ,
इन्हे 19 वर्ष की आयू में इन्हे रोम विश्वविद्यालय में एडमिशन (admission )मिल और बाद में उन्होंने इसी विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर बने हालांकि विश्व में अधिकांश लोग इन्हें केवल वायुमंडल दाब मापी (बैरोमीटर )के अविष्कार के लिए जानते है हलांकि सच यह है कि इन्होंने बैरोमीटर के अलावा कई महत्त्वपूर्ण अविष्कार किए थे,

इटली के फ्लोरेंस शहर में विज्ञान के संबन्धी एक संग्रहालय है/ इस में रखें बहुत से वैज्ञानीक साजों - समान के बीच चार इंच व्यास से कुछ अधिक का एक लेंस रखा हुआ है। इस लेंस की सत्यता को देखकर आज के लेंस निर्माता विशेषज्ञ भी आश्चर्यचकित हो जाते हैं। यह लेंस 1 मिमी. के 10,000वें भाग की सत्यता के साथ बना हुआ है।
हलकी उस समय ऐसी तकनीक उपलब्ध नहीं थी इस लेंस के निर्माणकर्ता थे इवानजेलिस्टा टोरिसेली (Evangelista Torricelli ) । इससे हम सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि इस वैज्ञानिक की प्रतिभा किस ऊंचे दर्जे मिली थी


इवानजेलिस्टा टोरिसेली (Evangelista Torricelli)वायुमंडलीय दाब मापी का खोज और उनकी कहानी इस प्रकार है



वायुमंडलीय दाब मापी के आविष्कारक के लिए पुरे विश्व इवानजेलिस्टा टोरिसेली को जनता है उस वायुमंडलीय दाब मापी के अविष्कार की कहानी भी बड़ी रोचक हैं/ इस कहानी को बहुत कम लोग जनते हैं/

कहानी इस प्रकार है सन् 1640 में टसकानि के ग्रेड ड्यूक ने अपने महल के अंदर में एक कुआं खुदवाया। कुआं खुद गया और पानी करीब 40 फुट की गहराई पर मिला । पानी को ऊपर लाने के लिए एक पम्प लगाया गया, जिसकी एक सिरा पानी में डूबी हुई थी। पम्प के हैंडल को बार-बार ऊपर-नीचे करने पर भी पानी टोटीी से बाहर नहीं आ पआ रहा था। यह केवल 33 फुट की ऊंचाई तक ही चढ़ पा रहा था। सोचा गया कि पम्प में कुछ खराबी है लेकिन काफी जांच करने पर भी उसमें कोई खरबि नहीं मिली।
इसकी सूचना ड्यूक को दी गई उन्हें भी समझ में नहीं आया उस समय गैलीलियो ड्यूक के विशिष्ट दार्शनिक और गणितज्ञ थे। यह समस्या सुलझाने के लिए उन्हें ही दी गई। गैलीलियो ने इस समस्या की कुछ व्याख्या तो की लेकिन वे स्वयं इस व्याख्या से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे इन्होने इस समस्या को सुलझने के लिए अपने शिष्य इवानजेलिस्टा टोरिसेली (Evangelista Torricelli) को दिए हलकी उन दिनों गैलीलियो के सचिव के रूप में कार्य कर रहे थे। कुछ ही दिनों मेंगैलीलियो की मृत्यु हो गई और उसके स्थान पर इवानजेलिस्टा टोरिसेली की नियुक्ति कर दी गई।
इसके बाद इवानजेलिस्ट टोरिसेली ने इस समस्या पर काम करना सुरु किया। इवानजेलिस्ट टोरिसेली का विश्वास था कि पम्प द्वारा भारी द्रव को इतनी ऊंचाई तक नहीं उठाया जा सकता, जितना कि किसी हलके द्रव को। इसलिए उन्होंने अपने प्रयोग के लिए पारे को चुना। पारा, पानी की तुलना में साढ़े तेरह गुना कम ऊंचाई तक ही उठाया जा सकता है। चूंकि पम्प से पानी को 33 फुट की ऊंचाई तक उठाया जा सकता था, इसलिए पारे को केवल 30 इंच की ऊंचाई तक ही उठा पाना सम्भव था। यह संख्या 33 फुट को 13.5 से विभाजित करने पर प्राप्त होती है। पानी के स्थान पर पारे को इस्तेमाल करने में सबसे बड़ी सरलता यह थी कि 33 फुट लम्बी नली के स्थान पर केवल 1 गज लम्बी नली ही पर्याप्त थी।
इन्होने कांच की एक नली ली। इसकी लम्बाई लगभग एक गज थी और उसका एक सिरा बंद था। पहले उन्होंने इस नली को पारे से भरा और उसके खुले सिरे को अंगूठे से दबाकर और नली को उलटा करके पारे से भरे कटोरे में डुबा दिया ताकि खुला सिरा पारे की सतह के नीचे रहे। जब उन्होंने अपने अंगूठे को नली के खुले सिरे से हटाया तो नली में पारा कुछ नीचे की ओर खिसका और पारे के स्तम्भ की लम्बाई 30 इंच रह गई। नली के ऊपरी भाग में जहां पहले पारा भरा था वहां खाली स्थान हो गया। बाद में इसी खाली स्थान का नाम ‘टोरिसेली निर्वात’ के नाम से पुकारा जाने लगा। इस प्रयोग से यह सिद्ध हो गया कि पानी को पम्प द्वारा मात्र इतनी ऊंचाई तक उठाया जा सकता है, जो 30 इंच x 13.6 के बराबर हो। यह ऊंचाई लगभग 33 फुट के करीब होती है। इस प्रयोग से कुएं में लगे पम्प की विफलता का कारण तो स्पष्ट हो ही गया, साथ ही साथ इन्होने टोरिसेली (Evangelista Torricelli) की यह नली वायुमंडलीय दाब माप(बैरोमीटर) के रूप में प्रयोग होने लगी।
इनके बनाए इस वायुमंडलीय दाब माप को जब पहाड़ की चोटी पर ले जाया गया. तो यह देखा गया कि ऊंचाई बढ़ने के साथ पारे के स्तंभ की ऊंचाई कम होती जाती है। इससे यह सिद्ध हुआ कि ऊंचाई के साथ-साथ वायुदाब घटता है। इसी प्रयोग के आधार पर ब्लेज पास्कल नामक वैज्ञानिक ने गैलीलियो के इस कथन की पुष्टि की
इस महान वैज्ञानिक ने कई प्रकार के दूरदर्शी, सूक्ष्मदर्शी और दूसरे प्रकाशीय उपकरणों के नमूने बनाए, जो बहुत ही शुद्धता के साथ बनाए गए थे। टोरिसेली न केवल प्रयोगात्मक वैज्ञानिक थे बल्कि एक अच्छे गणितज्ञ भी थे।इन्होंने इंटीग्रल कैलकुलस में भी कई महत्त्वपूर्ण सिद्धांतों का प्रतिपादन किया। सन् 1641 में इनकी पहली पुस्तक प्रकाशित हुई, जिसमें इन्होंने अपने गुरु गैलीलियो के सिद्धांतों का विवरण दिया था। इनके समय में हार्वे, बेकन, पास्कल आदि प्रसिद्ध वैज्ञानिक मौजूद थे दुर्भाग्य से इस वैज्ञानिक की मृत्यु 39 साल की आयु मे हो गय वह तिथि थी 15 अक्टूबर 1608 को इनकी मृत्यु हो गई
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